जब टैगोर ने विक्रम साराभाई को कैम्ब्रिज में पढ़ाई के लिए सिफारिशी पत्र लिखा

विक्रम साराभाई को भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। विक्रम साराभाई अहमदाबाद, गुजरात के व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले प्रसिद्ध जैन परिवार में जन्मे थे। उनके पिता अहमदाबाद के प्रमुख व्यापारियों में से एक थे। विक्रम साराभाई स्कूल के दिनों से ही बहुत सक्रिय और बहुतमुखी प्रतिभा के धनी मालूम होने लगे थे। उनकी स्मरण-शक्ति तेज़ थी और वह एक साथ कई तरह के क्रिया कलापों में अपना ध्यान एकाग्र कर पाते थे। इस बात का एक उदाहरण यह है कि बचपन में ही उन्हें हिंदी, अंग्रजी, संस्कृत, बांग्ला और गुजराती भाषाओं का ज्ञान था, गुजराती उनकी मातृभाषा भी थी। विक्रम न सिर्फ विभिन्न भाषाओं में निपुण थे बल्कि उन्हें इतिहास, भूगोल, मूर्तिकला, चित्रकला, संगीत, नृत्य, भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और कृषि जैसे विषयों में गहरी रूचि थी, जिसके ठोस उदाहरण उनके जीवन की तमाम घटनाओं से मिलते रहे हैं। बाद में उन्होंने गणित और भौतिकी को अपने जीवन का माध्यम बनाने का निर्णय लिया और उसमें महारत हासिल की। कला और साहित्य से उनका पैतृक रिश्ता था। उनके पिता जी कला और साहित्य में गहरी रूचि रखते थे और उनके यहाँ उस समय के नामचीन कलाकार और साहित्यिक व्यक्तित्व घर आकर अतिथि के रूप में समय गुज़ारा करते थे। ये सब साराभाई परिवार के परम मित्रों में से थे, और समय-समय पर इनके यहाँ आते रहते थे और साराभाई परिवार का आतिथ्य ग्रहण करते थे। Read more…..

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