निकोला टेस्ला का अपनी माँ के लिए पत्र

Nikola Tesla in his Lab

बुधवार, 18 नवम्बर

मेरी प्रिय माँ,

जब मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तो मैं दुखी और उदास हो जाता हूँ. मैं नहीं जानता कैसे, लेकिन मुझे ऐसा महसूस होता है कि आप सकुशल नहीं हैं. काश! मैं अभी एक गिलास पानी देने के लिए आपके पास बैठा होता. पिछले तमाम साल जो मैंने मानवता की सेवा में बिताये हैं, उन्होंने मुझे अपमान और तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं दिया. आज सुबह मैं जल्दी जाग गया था, सूरज उगने के कुछ समय पहले, क्योंकि मैंने आज सपने में कुछ ऐसा देखा जो मैं पिछले कुछ समय से लगातार सपनों में देख रहा हूँ. मैंने एक आवाज सुनी, जैसे कोई किसी बंजर मैदान में सुन्दर मंत्रोच्चारण या विलाप या कोई प्रार्थना कर रहा हो| जब मुझे होश आया तो मुझे एहसास हुआ कि यह आवाज़ हर तरफ से आ रही थी और मेरे लिए यह भी तय करना असंभव था कि क्या यह खुद के अन्दर आई हुई आवाज़ थी. मुझे अपना दिमाग ख़राब होने का अंदेशा हुआ था. यह बात मैं डॉक्टर लियोनेल को चुपके से नहीं बता पाया क्योंकि मुझे अब उनपर भरोसा नहीं होता. मैंने सुना है कि वह दो हफ्ते पहले ही श्रीमान एडिसन से मिलकर आये हैं…

गुरूवार, 19 नवम्बर

माँ, मैं एक बार फिर तुम्हारे बारे में ही सोच रहा हूँ और एक बार फिर मैं वाही बेचैनी और दुःख महसूस करता हूँ. जनता के लिए एक हफ्ते के लिए किये जाने वाले मेरे परीक्षणों को साकार करने हेतु प्रक्रिया तेज़ करने के लिए मैं पेटेंट दफ्तर को पत्र लिखूंगा. मुझे अपने घर, मातृभूमि, और तुम्हारे पास आना है. मैं अभी अच्छी तरह जानता हूँ कि आप सकुशल नहीं हैं क्योंकि एक बार फिर मैंने वह विलाप करती हुई आवाज़ सुनी, लेकिन इस बार मैं बहुत अच्छी तरह से जागा हुआ था. मैंने अब तक अपना होश नहीं खोया है.

शुक्रवार, 20 नवम्बर

मैंने पेटेंट दफ्तर को पत्र नहीं लिखा, उनका एक एजेंट यहीं आया था और मैंने उससे अपने इरादों के बारे में स्वयं ही बताया. उसने दुःख प्रकट किया, लेकिन वह तारीखें नहीं बदल सकतीं क्योंकि सभी कोंग्रेसजनों ने तारीखें निश्चित कर ली है. मैं झरनों की तरफ निकल गया था, और मैंने लड़कों को टरबाइनें तैयार रखने का आदेश दिया और मैंने उन्हें कल मेरी पुकार सुनने का इंतज़ार करने के लिए कहा.

मैंने निश्चय किया है कि मैं मानवता को ऐसा उपहार दूंगा जिसके वह लायक है और इसके बाद यूरोप लौट जाऊँगा, और अंततः तुम्हारे पास, माँ. यहाँ की सरकारें भी घर की ओर वाली सरकारों के जैसी हैं. मुझे अब अंततः महसूस होता है, कि मानवता इन्ही सरकारों पर निर्भर होती है और एक अकेला दुनिया नहीं बदल सकता. लेकिन वह अजूबी आवाजें मुझे अब भी सताती हैं. मैंने नहीं जानता कि इनका कोई सम्बन्ध आपसे भी है या मेरे प्रयोगों से, यह सब आध्यात्मिक जैसा है.

शनिवार, 21 नवम्बर

प्रिय माँ, मैं अब युगोस्लाविया के लिए निकल रहा हूँ. सुश्री नोरा बंदरगाह गयीं थी और मेरे लिए लिस्बन जाने का टिकट लायीं थीं. वहां से मैं ट्रेन से ज्यूरिख जाऊँगा, और वहां से सीधा घर आ जाऊंगा. इसमें मुझे लगभग दस दिन लगेंगे, किसी भी परिस्थिति में मुझे घर पहुँचने में दो हफ़्तों से अधिक समय नहीं लगेगा.

आज मैं कॉंग्रेस के दफ्तर वाले भवन गया था और कॉंग्रेस के अधिवेशन के बीच में ही मैंने उनसे कुछ मिनट का समय माँगा था. वह इस बात से बहुत खुश नहीं हुए लेकिन उन्होंने मुझे समय दिया. मैंने नियाग्रा झरने के पास बनी प्रयोगशाला फ़ोन करने के लिए कहा. वहाँ उपस्थित लड़कों ने टरबाइन को क्रियाशील कर दिया, जो कि पहले वाली टरबाइन से दस गुना क्षमता वाली है, जैसे कि मैंने वादा किया था. मैंने उनकी प्रतिक्रियाओं की बिलकुल भी परवाह नहीं की. मैं तुरंत हाल से वापस चला आया, क्योंकि मैंने यह सब उनके लिए नहीं किया था बल्कि मानवता के लिए किया था. ठीक उसी क्षण जब मैं बल्ब के अपनी “बेतार” विद्युत से चमकने की प्रतीक्षा कर रहा था उसी समय मुझे यह एहसास हुआ कि मैं इन सबका सृजन करने वाला अकेला नहीं हूँ.

मुझे महसूस हो रहा था कि जैसे कोई बिजली को नियाग्रा झरने से कोंग्रेस हाल तक लेकर आ रहा हो, और यह कि जिस नियम के कारण यह सब संभव हुआ था वह तो पहले से ही अस्तित्व में था. मैं इसे बनाने और मानवता को समझाने की प्रेरणा के आशीर्वाद वाला एक सौभाग्यशाली मात्र हूँ.

विजय और ख़ुशी के बजाय अन्दर एक खालीपन से युक्त दुःख उभर आया. मैंने महसोस किया कि मैंने जीवन में कुछ बड़ा खो दिया है. जैसे कि मैंने कुछ पूर्णरूप से अज्ञात को छोड़ दिया हो. कोई सूत्र मेरी समझदारी की सीमा के भीतर था और मैंने उसे खो दिया अथवा मैंने उसे स्पष्टता के साथ समझने की कोशिश ही नहीं की. यह सब निश्चित रूप से उस बंजर में विलाप से जुड़ा हुआ होगा, मैं इस बारे में अब सुनिश्चित हो गया हूँ.

रविवार, 22 नवम्बर

यह पत्र आपको कभी नहीं मिलेगा, माँ. मुझे नहीं मालूम मैं यह क्यों लिखता हूँ, यह जानते हुए भी कि तुम इसे पढ़ नहीं सकती……..तुम्हारी अंतिम यात्रा शुभ हो, माँ और मुझे वह रास्ते चुनने के लिए माफ़ कर देना जो रास्ते मुझे तुमसे दूर ले गए. मैं तुम्हारे अंतिम संस्कार में भी उपस्थित न हो सका. मुझे वह टेलीग्राम मिला जिसमें मुझे आपकी मौत की सूचना दी गई थी, और यहाँ यह तुच्छ लोग हैं जो दो साल पहले यह मानने को तैयार नहीं थे कि बिजली बिना तार की सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जा सकती है. अब उन्होंने यह सब अपनी आँखों से देखा है लेकिन वह इसे आने वाली सदियों में इस्तेमाल नहीं करेंगे क्योंकि किसी ने शहर के बाहर स्थित मेरी प्रयोगशाला को आग लगाकर ख़ाक कर दिया है, जिसमें  मेरे सभी सूत्र और लिखे हुए दस्तावेज जलकर राख हो गए हैं. वह इस सबके पीछे श्री एडिसन का हाथ होने की शंका जाता रहे हैं.

मैं इतना बदल गया हूँ कि मैं खुद को भी पहचान पाने में सक्षम नहीं हूँ. मैं पहले भले ही बहुत दुखी था, मगर अब दुखी नहीं हूँ, क्योंकि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोई “मेरे” पेटेंट्स को नियंत्रित कर रहा है कि मेरी खोजें मेरी हैं हीं नहीं, कि मानवता अभी इनका इस्तेमाल करने के लिए तैयार/परिपक्व नहीं है. मैं जानता हूँ कि कोई है जो सब कुछ देख रहा है और उसकी कोई निश्चित योजना है, शायद यही कारण है कि मैं विरक्त हो चुका हूँ.

लिस्बन जाने वाला मेरा जहाज 11 बजे यहाँ से छूटेगा. मेरी कार बाहर इन्तेजार कर रही है.

मैं यह पत्र आपकी कब्र पर रख दूंगा, जब मैं अपने गाँव के कब्रगाह आऊंगा. मुझे अब कुछ ऐसे में विश्वास होता है जिसपर मैंने कभी विश्वास नहीं किया. मुझे विश्वास है कि मैं अब अभी आपका एक हिस्सा हूँ, और यह कि जीवन कुछ अच्छा करने के लिए ख़त्म नहीं हुआ है. मुझे अब तुर्क लोगों को टालने का दुःख महसूस होता है क्योंकि वे लोग उसी तरह उदासी के गीत गाते थे जो मैंने पहले सुबह के सपनों में सुने थे. मुझे अब एहसास होता है कि वे इन सब बातों के बारे में बहुत पहले से जानते थे जिन्हें मैं अब जानता हूँ.

विज्ञान में बिताये वह तमाम साल व्यर्थ थे. प्रिय माँ, मेरे लिए वहाँ से प्रार्थना करना अगर तुम ऐसा कर सको, और अपने बेचारे अबोध बेटे की भटकी हुई आत्मा के लिए उस बंजर विलाप को गुनगुनाना……..

(इस पत्र की सत्यता की जांच कभी भी नहीं हो पाई)

2 Comments

  1. Dear Mehar, bringing this to light is a great job. Of course, difficult to know if genuine or a work of anti-Edison lobby! But true that most creative people including inventers and innovators get recognition mostly after death. In every age, they haven’t got their dues and lived in penury. May be you can write based on material from different sources and publish a book. Treating all with the one same angle such as value from peers, recognition from society, competition, the low thiughts (greed, jealousy..) or altruistic feelings (Curie did not patent radium).

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  2. It’s always feels good to read your article. I’ve never been through any of these stories and letters as its never get published by anyone and so I always use to wait for it.
    Love it sir. Specially the way you use to write them in your style.

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